Friday, April 15, 2011

कट कट....

पुरे ती कट कट वट वट सारी
रोजची  झंजट रोजच मारी

पुरे तो कायम वेळेचा फास
त्यात गुदमरलाय मोकळा श्वास

पुरे तो बटनांचा टप टप खेळ
झोपायची आता झालिये वेळ
                                  - शैलेश रमेश कळमकर

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